मुक्तक
छुप गये सितारे अभी अभी
चाँद भी छुप गया अभी अभी
करने लगे सवाल कुछ लोग
क्यों बढ़ गया तिमिर अभी अभी ।
अशोक बाबू माहौर
मुक्तक
भुलक्कड़ बनारसी
काशी काव्य गंगा साहित्यिक मंच वाराणसी पंजीकृत की स्थगित गोष्ठी पुनः शनिवार दिनांक 25…
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