मुक्तक
छुप गये सितारे अभी अभी
चाँद भी छुप गया अभी अभी
करने लगे सवाल कुछ लोग
क्यों बढ़ गया तिमिर अभी अभी ।
अशोक बाबू माहौर
मुक्तक
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काशी काव्य गंगा साहित्यिक मंच वाराणसी पंजीकृत की 188 वीं गोष्ठी शनिवार को मेरे कार्य…
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