हाइकू
धरती हरी
लहरा रही घास
मन भावन।
संकट बड़ा
उदास हुए लोग
जान जोखिम।
पड़ोसी आज
हो रहा मस्तमौला
करे मजाक।
तीखी नज़र
ड़रा रही सबको
अंतिम साँस।
- अशोक बाबू माहौर
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