हाइकु
बूढ़े हो रहे
घने वृक्ष वन के
निराश खडे़।
घने वृक्ष वन के
निराश खडे़।
आँखें मलती
ड़ालियाँ हरी भरी
पत्तियाँ टूटी।
ड़ालियाँ हरी भरी
पत्तियाँ टूटी।
अशोक बाबू माहौर
lekh
गर्मी का कहर: बढ़ती तपिश और हमारी जिम्मेदारी
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