पुरानी बात
उतरती मन में
झकोरे तन |
लालच बला
फिर भी भाती मन
दुखता तन |
अशोक बाबू माहौर
गर्मी का कहर: बढ़ती तपिश और हमारी जिम्मेदारी
साहित्यधर्म मंच