लालच भरी
मन खूब दबाए
चेहरा नम |
तकिया फटी
रखी चारपाई पे
करे गुमान |
अशोक बाबू माहौर
काव्य गोष्ठी एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह:-
साहित्यधर्म मंच