लालच भरी
मन खूब दबाए
चेहरा नम |
तकिया फटी
रखी चारपाई पे
करे गुमान |
अशोक बाबू माहौर
काशी काव्य गंगा साहित्यिक मंच वाराणसी पंजीकृत में देहरादून से पधारे वरिष्ठ साहित्यका…
साहित्यधर्म मंच