कश्ती डूबती
तेज आँधियाँ चलीं
किनारा नहीं |
बारिश खूब
झमाझम हो रही
डूबी सड़क |
अशोक बाबू माहौर
भुलक्कड़ बनारसी
काशी काव्य गंगा साहित्यिक मंच वाराणसी पंजीकृत की 191 वीं गोष्ठी शनिवार को मेरे कार्य…
Copyright (c) 2025SAAHITYA DHARM BLOGGING All Right Reseved