हाइकू
टूटी दीवार
आँखें झाँकती कई
बना तमाशा |
आँगन छोटा
बच्चे हुए उदास
खेलते कहाँ |
अशोक बाबू माहौर
काव्य गोष्ठी एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह:-
साहित्यधर्म मंच