राम ही आधार है
जीवन में राम ही आधार है।
राम बिन सारा जग निराधार है।।
उल्टा नाम जप के भी तर गए,
डाकू से महान संत बन जीवन में राम ही आधार है।
राम बिन सारा जग निराधार है।। गए।
राम राम राम ही आधार है।।
राम बिन सारा जग निराधार है।।
पत्थर भी तैरे राम नाम लिखकर,
सेतु बना संभव किया था कार्य दुष्कर।
राम नाम महिमा अपार है।।
राम बिन सारा जग निराधार है।।
ऋषियों पर विपदा आई थी भारी,
श्राप से पत्थर बन गई नारी।
राम ने किया उद्घार है।।
राम बिन सारा जग निराधार है।।
हर श्वास प्राणी राम नाम जपो रे,
जल में कमल जैसे जग में रहो रे।
निर्लिप्त का ही बेड़ा पार है।।
राम बिन सारा जग निराधार है।।
जीवन में राम ही आधार है।
राम बिन सारा जग निराधार है।।
रश्मि पांडेय 'शुभि'
डिंडोरी, म.प्र.
