हाइकू
दुखती आँखें
लगा लिया सुरमा
सुखी बदन |
ढ़ेरों सवाल
कुछ नहीं जवाब
तीखे तेवर |
आम आदमी
नंगे पैर चलता
उदासी नहीं |
हरित खेती
मन पुलकित है
आयी बहार |
जागते सोते
खेत पर किसान
जाड़े पसरे |
अशोक बाबू माहौर
हाइकू
भुलक्कड़ बनारसी
काशी काव्य गंगा साहित्यिक मंच वाराणसी पंजीकृत की 191 वीं गोष्ठी शनिवार को मेरे कार्य…
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