हाइकु
धूप किनारे
खिसक रही अब
बादल छाये ।
गर्म महीना
तपन बड़ रही
कंठ सूखता ।
अशोक बाबू माहौर
काव्य गोष्ठी एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह:-
साहित्यधर्म मंच