हाइकु
तेज फुहार
कड़कती बिजली
डरता मन ।
सुबह हुई
जगमग धरती
मन प्रसन्न ।
अशोक बाबू माहौर
भुलक्कड़ बनारसी
काशी काव्य गंगा साहित्यिक मंच वाराणसी पंजीकृत की 191 वीं गोष्ठी शनिवार को मेरे कार्य…
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