हाइकु
तेज फुहार
कड़कती बिजली
डरता मन ।
सुबह हुई
जगमग धरती
मन प्रसन्न ।
अशोक बाबू माहौर
काव्य गोष्ठी एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह:-
साहित्यधर्म मंच