हाइकू
फूल गुलाबी
लगे मखमल सा
आँखें शराबी।
घुँघरू बजे
नाच गायन होता
सुनते कान।
बड़ा मकान
आगे छोटी दुकान
बिके सामान।
तालाब नया
पानी उमड़ रहा
देखते लोग।
- अशोक बाबू माहौर
article
काशी काव्य गंगा साहित्यिक मंच वाराणसी पंजीकृत की 188 वीं गोष्ठी शनिवार को मेरे कार्य…
Copyright (c) 2025SAAHITYA DHARM BLOGGING All Right Reseved