हाइकू
फूल गुलाबी
लगे मखमल सा
आँखें शराबी।
घुँघरू बजे
नाच गायन होता
सुनते कान।
बड़ा मकान
आगे छोटी दुकान
बिके सामान।
तालाब नया
पानी उमड़ रहा
देखते लोग।
- अशोक बाबू माहौर
भुलक्कड़ बनारसी
काशी काव्य गंगा साहित्यिक मंच वाराणसी पंजीकृत की स्थगित गोष्ठी पुनः शनिवार दिनांक 25…
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