हाइकू शहरी बाबू वकालत हाँकता समझे कौन।रूठती बच्ची खिलौना पास नहीं माँ समझाती।तारे अनेक टिमटिमाते खूब उजाला साफ।
शहरी बाबू
वकालत हाँकता
समझे कौन।
रूठती बच्ची
खिलौना पास नहीं
माँ समझाती।
तारे अनेक
टिमटिमाते खूब
उजाला साफ।
-अशोक बाबू माहौर
साहित्यधर्म मंच