दरारों सी ज़िंदगियाँ
(लघुकथा संग्रह)
लेखक:
अशोक बाबू माहौरप्रकाशक:
शब्दांकुर प्रकाशन, जे-2nd-41, मदनगीर, नई दिल्ली 110062
मूल्य: ₹200
'दरारों सी ज़िंदगियाँ' लेखक अशोक बाबू माहौर का एक संवेदनशील लघुकथा-संग्रह है, जिसमें ग्रामीण जीवन, सामाजिक विषमताओं, मानवीय रिश्तों, संघर्ष, अभाव और बदलते सामाजिक परिवेश का यथार्थपूर्ण चित्रण किया गया है। संग्रह की लघुकथाएँ आम आदमी के जीवन की पीड़ा, आशा, आत्मसम्मान और जिजीविषा को सरल, सहज और प्रभावशाली भाषा में अभिव्यक्त करती हैं। लेखक ने अपने अनुभवों और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से ऐसे पात्रों का सृजन किया है जो पाठकों के मन पर गहरी छाप छोड़ते हैं। यह पुस्तक केवल मनोरंजन नहीं करती, बल्कि समाज की वास्तविकताओं से परिचित कराते हुए संवेदनशीलता, मानवीय मूल्यों और सकारात्मक परिवर्तन का संदेश भी देती है।
