हाइकू(अशोक बाबू माहौर)

       
     उड़ते पंछी
     गगन चूम रहे
     मस्त मगन

     धीमी बारिश
     नदियाँ सूखी सर्री
     दबती धूल

     आपके घर
     खूब होता दंगल
     देखे पडोसी



         अशोक बाबू माहौर














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