पाँव पसार
गर्मी पसर रही
खूब पसीना |
होंठ चलाती
कहती अनाप सी
गाल फुलाती |
अशोक बाबू माहौर
काव्य गोष्ठी एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह:-
साहित्यधर्म मंच