अब कहाँ वो दीवालों पर लिखना साफ़ करना पोतना कालिग से दौड़कर आँचल थामना मा…
Read more »नारी कर संघर्ष नारी खड़ी हो कर संघर्ष अब संभाल अपने अस्तित्व को विकाश को उ…
Read more »उड़ते पंछी गगन चूम रहे मस्त मगन धीमी बारिश नदियाँ सूख…
Read more »बारिश में संघर्ष संध्या हो चुकी थी,बारिश थमने का नाम ही नहीं ले रही I …
Read more »क्या देखा है उस पर्वत की ओर क्या देखा है ? हमने हताश कुछ नहीं, कुछ भी I …
Read more »व्याकुल जीव - जंतु
Read more »हाइकू पैदल चले लोग सड़क पर अजीब बात । खामोश हवा गुनगुनाती नहीं सन्नाटा खूब । …
Read more »भीड़ खचाखच भीड़ खचाखच ट्रेन में फिर भी लोग चिपके जा रहे बहाते पसीना बैठे, खड़े स्तम्भ …
Read more »नभ की ओर नभ की ओर घूर उठ बैठी मिचलाती आँखें बिटिया नन्ही स्पर्श कर देह उ…
Read more »मधु संताप यूँहीं हरी घास पर मधुमक्खी गुस्सा उतारकर चली गई जैसे चुरा लिया हो कुर्…
Read more »लालच भरी मन खूब दबाए चेहरा नम | तकिया फटी रखी चारपाई पे करे गुमान | अशोक बाबू माहौर
Read more »तुम नारी हो खामोश क्यों? loading... तुम्हारे होंठ सिले सिले से तुम नारी …
Read more »दरारों सी ज़िंदगियाँ (लघुकथा संग्रह) लेखक: अशोक बाबू माहौर प्रकाशक : शब्दांकुर प्रकाशन, जे-2n…
Read more »कौन सी बात कडुवी चुभ गयी बताओ हमें अशोक बाबू माहौर
Read more »पेड़ों पर पेड़ों पर जमी बैठी सुबह से बूँदें गोल मटोल मुस्काती डाली पत्तियों…
Read more »आपने कितने टुकड़े कर दिए घास के मुझे अच्छा नहीं लगा मैं रुठ गया हूँ अपनो से पता नहीं क्य…
Read more »घर कंगाल भूखा पेट रुलाय दाल ना आटा | बारिश तेज भिगो दिया शहर बुरे हालात | अशोक …
Read more »हाइकु घटा वजन अंग अंग फुर्तीला करे सफर | अशोक बाबू माहौर
Read more »खामियाँ थी मेरी खामियाँ थी सब मेरी मैंने ही जलाये थे सपने कूड़े के ढेर में …
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